1. दोनों की रज़ामंदी
निकाह के लिए दुल्हन और दूल्हे दोनों की आज़ाद रज़ामंदी ज़रूरी है। किसी की भी शादी उसकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ नहीं की जा सकती। परिवार रहनुमाई और मशवरा देते हैं, लेकिन फ़ैसला उन्हीं दोनों का है जिन्हें साथ ज़िंदगी गुज़ारनी है।
2. वली
वली दुल्हन का सरपरस्त होता है, आमतौर पर वालिद, फिर दादा, भाई या कोई और क़रीबी मर्द रिश्तेदार। ज़्यादातर उलमा के नज़दीक वली की शिरकत निकाह की शर्त है; हनफ़ी मसलक बालिग़ औरत को ख़ुद निकाह करने की इजाज़त देता है, फिर भी वली को शामिल करने की ताकीद करता है। आपका मसलक जो भी हो, वली की शिरकत दुल्हन की हिफ़ाज़त करती है और दोनों परिवारों को जोड़ती है। Weds.me पर आप वली की जानकारी जोड़ सकते हैं, जो सिर्फ़ उन रिश्तों से साझा होती है जिन्हें आप क़बूल करें।
3. दो गवाह
निकाह दो बालिग़, आक़िल और भरोसेमंद मुस्लिम गवाहों के सामने होता है जो ईजाब और क़बूल सुनते हैं। बहुत से परिवार रिश्तेदारों और दोस्तों को भी बुलाते हैं, क्योंकि इस्लाम में निकाह ऐलानिया होना चाहिए, छुपा हुआ नहीं।
4. महर
महर दूल्हे की तरफ़ से दुल्हन को दिया जाने वाला तोहफ़ा है और सिर्फ़ उसी का हक़ है। यह रक़म, सोना, जायदाद या कोई फ़ायदेमंद चीज़ हो सकती है, और इसकी मिक़दार दोनों तरफ़ की रज़ामंदी से तय होती है। इसे निकाह के वक़्त (मुअज्जल) या बाद में (मुवज्जल) अदा किया जा सकता है। महर को मुनासिब रखने और पूरा अदा करने की ताकीद की गई है।
5. ईजाब और क़बूल
निकाह की असल बात पेशकश (ईजाब) और मंज़ूरी (क़बूल) है, जो एक ही मजलिस में गवाहों के सामने साफ़ तौर पर कही जाती है। क़ाज़ी या इमाम आमतौर पर निकाह का ख़ुत्बा पढ़ते हैं, रज़ामंदी पूछते हैं, महर दर्ज करते हैं और निकाहनामे पर दस्तख़त करवाते हैं।
6. वलीमा
वलीमा निकाह के बाद दूल्हे की तरफ़ से दी जाने वाली दावत है जिससे परिवार और समाज में निकाह का ऐलान होता है। यह सुन्नत है और इसके लिए धूमधाम ज़रूरी नहीं। हमारे हॉल और हलाल कैटरिंग की लिस्टिंग मदद कर सकती है।
7. सरकारी रजिस्ट्रेशन
बहुत से मुल्कों में सिर्फ़ मज़हबी निकाह क़ानूनी तौर पर काफ़ी नहीं होता। जहाँ आप रहते हैं वहाँ की सरकारी व्यवस्था में शादी रजिस्टर कराएँ और दस्तख़त वाले निकाहनामे की कॉपी संभाल कर रखें। एक क़ाज़ी आमतौर पर स्थानीय ज़रूरतें बता सकता है।
निकाह से पहले
- परिवार की मौजूदगी में मिलें और ज़रूरी सवाल पूछें: दीन, माली हालात, कहाँ रहेंगे, बच्चे, करियर और उम्मीदें।
- सलातुल इस्तिख़ारा पढ़ें और फ़ैसले में अल्लाह से रहनुमाई माँगें।
- शादीशुदा ज़िंदगी की तैयारी के लिए शादी से पहले का कोर्स करने पर ग़ौर करें।
- ऑनलाइन मिले किसी भी शख़्स से निजी जानकारी साझा करने से पहले हमारे सुरक्षा दिशानिर्देश पढ़ें।
- निकाह में पढ़ने या कार्ड पर छपवाने के लिए निकाह पर क़ुरआन की आयतें देखें।